રવિવાર, મે 08, 2022

आजमानेसे

करें तो क्या करें हम भी शिकायत इस जमानेसे, 
धुआँ उठता रहा है खुद हमारे आशियानेसे । 

लगी थी चोट ऐसी भी नहीं मालूम था लेकिन, 
सुना है आईना रोया हमारे टूट जानेसे । 

गिला तुमसे नहीं लोगो हमेंं क्यों आजमाया है, 
हमारे अपने भी रूके कहाँ थे आजमानेसे। 

पता भी तो नहीं था ये महोब्बत मौत लायेगी, 
खतम हो जायेगी दुनिया जरासा दिल लगानेसे। 

न आना चाहिये "आनंद" उनको याद करनेमे, 
उदासी रूठ जाती है कभी भी मुस्कुरानेसे । 

विनोद नगदिया (आनंद ) 




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